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  • अभिभावको का दुलार

    अभिभावको का दुलार - अंकुर के पल्लवित होने की आयु शैशव कहलाती है। जन्म से दो-तीन वर्ष तक के बच्चे तो अपने शरीर की आवश्यकताएँ पूरी कराने के फेर में ही रहते हैं। उनकी इच्छा, आवश्यकता तो प्रकट होती है, पर न तो स्वतन्त्र व्यक्तियों का विकास होता है और न ही उचित-अनुचित का बोध। वे अपना हित-अनहित भी नहीं समझते, इसलिए प्रायः ऐसी हरकतें करते रहते हैं, जो उनके लिए तो कुछ करने की उमंग...

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